आज का पंचांग - आज 15 अप्रेल 2024 , सोमवार ।। वैदिक पंचांग ।। हिन्दू पंचांग कैलेंडर 2024
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🚩श्री गणेशाय नम:🚩
📜आज का वैदिक पंचांग 📜
💢 15 - Apr - 2024
💢 Balasore, India
⚛️ पंचांग
⚛️ तिथि सप्तमी 12:14 PM
⚛️ नक्षत्र पुनर्वसु +03:06 AM
⚛️ करण :
वणिज 12:14 PM
विष्टि 12:14 PM
⚛️ पक्ष शुक्ल
⚛️ योग सुकर्मा 11:07 PM
⚛️ वार सोमवार
⚛️ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
⚛️ सूर्योदय 05:22 AM
⚛️ चन्द्रोदय 10:46 AM
⚛️ चन्द्र राशि मिथुन
⚛️ सूर्यास्त 06:01 PM
⚛️ चन्द्रास्त +00:45 AM
⚛️ ऋतु वसंत
⚛️ हिन्दू मास एवं वर्ष
⚛️ शक सम्वत 1946 क्रोधी
⚛️ कलि सम्वत 5126
⚛️ दिन काल 12:39 PM
⚛️ विक्रम सम्वत 2081
⚛️ मास अमांत चैत्र
⚛️ मास पूर्णिमांत चैत्र
⚛️ अभिजित 11:17:04 - 12:07:41
⚛️ राहु काल 06:57 AM - 08:32 AM
⚛️ दिशा शूल पूर्व
∆ व्रत / पर्व विवरण :- चैत्री नवरात्रि की सप्तमी तिथि के दिन देवी पार्वती की कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। यदि नवरात्रि में 9 दिन व्रत उपवास न रख सके तो सप्तमी अष्टमी व नवमी तिथि को उपवास अवश्य करें।
विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता। अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🔹चैत्र नवरात्रि (9 अप्रैल से 17 अप्रैल 2024)🔹
🌹 महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं कालरात्रि । नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है । मां कालरात्रि की आराधना के समय भक्त को अपने मन को भानु चक्र ( ललाट अर्थात सिर के मध्य ) पर स्थित करना चाहिए । इस आराधना के फलस्वरूप भानु चक्र की शक्तियां जागृत होती हैं । मां कालरात्रि की भक्ति से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट होता है । जीवन की हर समस्या को पल भर में हल करने की शक्ति प्राप्त होती है । शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर परिस्थिति में विजय दिलाती हैं ।
🌹 नवरात्रि की सप्तमी तिथि यानी सातवें दिन माता दुर्गा को गुड़ का भोग लगाएं । इससे हर मनोकामना पूरी हो सकती है ।
यह भी जानें -
🔹 सोमवार विशेष 🔹
🔸कार्यों में सफलता-प्राप्ति हेतु
🔸जो व्यक्ति बार-बार प्रयत्नों के बावजूद सफलता प्राप्त न कर पा रहा हो अथवा सफलता-प्राप्ति के प्रति पूर्णतया निराश हो चुका हो, उसे प्रत्येक सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे सायंकाल के समय एक दीपक जला के उस वृक्ष की ५ परिक्रमा करनी चाहिए । इस प्रयोग को कुछ ही दिनों तक सम्पन्न करनेवाले को उसके कार्यों में धीरे-धीरे सफलता प्राप्त होने लगती है ।
ऋषिप्रसाद – जनवरी २०२१ से
🔸सोमवार को बाल कटवाने से शिवभक्ति की हानि होती है ।
🔸सोमवार को तथा दोपहर के बाद बिल्वपत्र न तोड़ें ।
🔹बुरे व विकारी सपनों से बचाव🔹
रात्रि को सोने से पूर्व 21 बार 'ॐ अर्यमायै नमः' मंत्र का जप करने से तथा तकिये पर अपनी माँ का नाम लिखने से (स्याही-पेन से नहीं, केवल उँगली से) व्यक्ति बुरे एवं विकारी सपनों से बच जाता है ।
🔹आरती में कपूर का उपयोग क्यों ?🔹
🔸सनातन संस्कृति में पुरातन काल से आरती में कपूर जलाने की परम्परा है । आरती के बाद आरती के ऊपर हाथ घुमाकर अपनी आँखों पर लगाते हैं, जिससे दृष्टी -इन्द्रिय सक्रिय हो जाती है । पूज्य बापूजी के सत्संग -वचनामृत में आता है : “आरती करते हैं तो कपूर जलाते हैं । कपूर वातावरण को शुद्ध करता है, पवित्र वातावरण की आभा पैदा करता है । घर में देव-दोष है, पितृ -दोष हैं, वास्तु -दोष हैं, भूत -पिशाच का दोष है या किसीको बुरे सपने आते हैं तो कपूर की ऊर्जा उन दोषों को नष्ट कर देती है ।
🔸बोलते हैं कि संध्या होती है तो दैत्य-राक्षस हमला करते हैं इसलिए शंख , घंट बजाना चाहिए, कपूर जलाना चाहिए, आरती-पूजा करनी चाहिए अर्थात संध्या के समय और सुबह के समय वातावरण में विशिष्ट एवं विभिन्न प्रकार के जीवाणु होते हैं जो श्वासोच्छवास के द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करके हमारी जीवनरक्षक जीवनरक्षक कोशिकाओं से लड़ते हैं । तो देव-असुर संग्राम होता है, देव माने सात्त्विक कण और असुर माने तामसी कण । कपूर की सुगंधि से हानिकारक जीवाणु एवं विषाण रूपी राक्षस भाग जाते हैं ।
🔸वातावरण में जो अशुद्ध आभा है इससे तामसी अथवा निगुरे लोग जरा-जरा बात में खिन्न होते हैं, पीड़ित होते हैं लेकिन कपूर और आरती का उपयोग करनेवालों के घरों में ऐसे कीटाणुओं का, ऐसो हलकी आभा का प्रभाव नहीं टिक सकता है ।
🔸अत: घर में कभी-कभी कपूर जलाना चाहिए, गूगल का धूप करना चाहिए । कभी-कभी कपूर की १ – २ छोटी-छोटी गोली मसल के घर में छिटक देनी चाहिए । उसकी हवा से ऋणायान बनते हैं, जो हितकारी हैं । वर्तमान के माहौल में घर में दीया जलाना अथवा कपूर की कभी-कभी आरती कर लेना अच्छा है ।
ऋषि प्रसाद – जुलाई २०२१ से
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