रविवार, 25 फ़रवरी 2024

Aaj Ka Panchang | 25 February 2024 | आज का पंचांग | 25 फरवरी 2024

       📜 आज का वैदिक पंचांग 📜


Aaj Ka Panchang

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दिनाँक - 25 फरवरी 2024 , रविवार

  Balasore, India


🔅 विक्रम सम्वत  2080  

🔅 अयन उत्तरायण

🔅 मास फाल्गुन  

🔅 पक्ष  कृष्ण  

🔅 तिथि  प्रतिपदा  08:39 PM

🔅 वार  रविवार  

🔅 ऋतु  वसंत  

🔅 दिन काल  11:37 AM 

🔅 नक्षत्र  पूर्वा फाल्गुनी  +01:25 AM

🔅 करण :

           बालव  07:20 AM

           कौलव  07:20 AM

🔅 योग  सुकर्मा  02:27 PM

🔅 सूर्योदय 06:07 ए एम

🔅 सूर्यास्त 05:44 पी एम 

🔅 चन्द्रोदय  06:29 PM  

🔅 चन्द्रास्त  06:35 AM

🔅 चन्द्र राशि  सिंह    

🔅 अभिजित  11:32 - 12:18

🔅 राहु काल  04:17 PM - 05:44 PM

🔅 ब्रह्म मुहूर्त 04:28 AM से 05:17 AM

🔅गोधूलि मुहूर्त 05:42 PM से 06:07 PM 

🔅 दिशा शूल  पश्चिम  


व्रत पर्व विवरण -

विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)


∆ रविवार विशेष 


रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)


रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)


रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)


रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।


रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए ।


स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।


रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।


रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।


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शनिवार, 24 फ़रवरी 2024

प्रेरणादायक कहानियाँ - लक्ष्य की प्राप्ति । Inspirational Stories - Achieving Goals । #Vedicsanskrti

 प्रेरणादायक कहानियाँ - लक्ष्य की प्राप्ति

Inspirational Stories - Achieving Goals


Inspirational Stories - Achieving Goals

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एक लड़के ने एक बार एक बहुत ही धनवान व्यक्ति को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया। वह धन कमाने के लिए कई दिनों तक मेहनत कर धन कमाने के पीछे पड़ा रहा और बहुत सारा पैसा कमा लिया।


इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हो गई। विद्वान के ऐश्वर्य को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया और अब उसने विद्वान बंनने का निश्चय कर लिया और अगले ही दिन से धन कमाने को छोड़कर पढने-लिखने में लग गया। वह अभी अक्षर ज्ञान ही सिख पाया था, की इसी बीच उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ से हो गई। उसको संगीत में अधिक आकर्षण दिखाई दिया, इसीलिए उसी दिन से उसने पढाई बंद कर दी और संगीत सिखने में लग गया।

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इसी तरह काफी उम्र बित गई, न वह धनी हो सका ना विद्वान और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ। एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत बड़े महात्मा से हुई। उसने महात्मन को अपने दुःख का कारण बताया। महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनियां के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रूचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर पाओगे।


युवक महात्मा की बात को समझ गया और एक लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा।


शिक्षा:-

उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हम जिस भी कार्य को करें, पूरे तन और मन से से एकाग्रचित होकर करें, बार-बार इधर-उधर भटकने से बेहतर यही की एक जगह टिककर मेहनत की जाएं, तभी सफलता प्राप्त की जा सकती हैं।

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Aaj Ka Panchang । 24 february 2024 । आज का पंचांग । 24 फरवरी 2024 । वैदिक संस्कृति

 

Aaj Ka Panchang । 24 february 2024 । आज का पंचांग । 24 फरवरी 2024 । वैदिक संस्कृति


Aaj ka panchang

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आज का वैदिक पंचांग ( Balasore , Odisha )

दिनांक - 24 फरवरी 2024
दिन - शनिवार
विक्रम संवत् - 2080
अयन - उत्तरायण
ऋतु - वसंत
मास - माघ
पक्ष - शुक्ल
तिथि - पूर्णिमा शाम 05:59 तक तत्पश्चात प्रतिपदा
नक्षत्र - मघा रात्रि 10:20 तक तत्पश्चात पूर्वा फाल्गुनी
योग - अतिगंड दोपहर 01:35 तक तत्पश्चात सुकर्मा
राहुकाल - सुबह 09:02 से 10:29 तक
सूर्योदय - 06:07
सूर्यास्त - 05:44
दिशा शूल - पूर्व
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:28 ए एम से 05:18 ए एम
निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:31 पी एम से 12:20 ए एम, फरवरी 25
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:32 ए एम से 12:19 पी एम

व्रत पर्व विवरण - माघी पूर्णिमा, संत रविदास जयंती , ललीता जयंती , मासी मागम , माघ पूर्णिमा व्रत , अन्वाधान , गण्डमूल , आडल योग ।

विशेष - पूर्णिमा दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

 माघी पूर्णिमा : 24 फरवरी


ऐसे तो माघ की प्रत्येक तिथि पुण्यपर्व है, तथापि उनमें भी माघी पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्त्व है । इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर भगवत्पूजन, श्राद्ध तथा दान करने का विशेष फल है । जो इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करता है, वह अश्वमेध यज्ञ का फल पाकर भगवान विष्णु के लोक में प्रतिष्ठित होता है ।

माघी पूर्णिमा के दिन तिल, सूती कपड़े, कम्बल, रत्न, पगड़ी, जूते आदि का अपने वैभव के अनुसार दान करके मनुष्य स्वर्गलोक में सुखी होता है। ‘मत्स्य पुराण’ के अनुसार इस दिन जो व्यक्ति ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण’ का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।

शनिवार के दिन विशेष प्रयोग


शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)

 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)

आर्थिक कष्ट निवारण हेतु


एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।

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शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2024

Aaj Ka Panchang । 23 february 2024 । आज का पंचांग । 23 फरवरी 2024 । वैदिक संस्कृति

                 आज का वैदिक पंचांग

Aaj Ka Panchang


Aaj Ka Panchang । 23 february 2024 । आज का पंचांग । 23 फरवरी 2024 । वैदिक संस्कृति

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दिनांक - 23 फरवरी 2024

दिन - शुक्रवार

विक्रम संवत् - 2080

अयन - उत्तरायण

ऋतु - वसंत

मास - माघ

पक्ष - शुक्ल

तिथि - चतुर्दशी दोपहर 03:33 तक तत्पश्चात पूर्णिमा

नक्षत्र - अश्लेषा रात्रि 07:25 तक तत्पश्चात मघा

योग - शोभन दोपहर 12:48 तक तत्पश्चात अतिगंड

राहुकाल 10:29 ए एम से 11:56 ए एम

सूर्योदय - 06:08 AM ( बालासोर समयनुसार )

सूर्यास्त - 05:44 PM

दिशा शूल - पश्चिम

ब्रह्म मुहूर्त 04:29 ए एम से 05:18 ए एम

निशिता मुहूर्त 11:31 पी एम से 12:20 ए एम, फरवरी 24

अभिजित मुहूर्त 11:33 ए एम से 12:19 पी एम

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व्रत पर्व विवरण -

विशेष - चतुर्दशी दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)


          माघी पूर्णिमा : 24 फरवरी 2024


 ऐसे तो माघ की प्रत्येक तिथि पुण्यपर्व है, तथापि उनमें भी माघी पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्त्व है । इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर भगवत्पूजन, श्राद्ध तथा दान करने का विशेष फल है । जो इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करता है, वह अश्वमेध यज्ञ का फल पाकर भगवान विष्णु के लोक में प्रतिष्ठित होता है ।

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बुधवार, 21 फ़रवरी 2024

कर्म की शुरुआत । प्रेरणादायक कहानियाँ

 

प्रेरणादायक कहानियाँ - Beginning Of Karma



Beginning Of Karma - प्रेरणादायक कहानियाँ



कर्म की शुरुआत


एक युवक ने एक संत से कहा, ‘महाराज, मैं जीवन में सर्वोच्च शिखर पाना चाहता हूं लेकिन इसके लिए मैं निम्न स्तर से शुरुआत नहीं करना चाहता।क्या आप मुझे कोई ऐसा रास्ता बता सकते हैं जो मुझे सीधा सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा दे।’


संत बोले, ‘अवश्य बताऊंगा। पहले तुम आश्रम के बगीचे से सबसे सुंदर गुलाब का फूल लाकर मुझे दो।लेकिन एक शर्त है।जिस गुलाब को तुम पीछे छोड़ जाओगे, उसे पलटकर नहीं तोड़ोगे।’युवक यह आसान सी शर्त मानकर बगीचे में चला गया। वहां एक से एक सुंदर गुलाब खिले थे।जब भी वह एक गुलाब तोड़ने के लिए आगे बढ़ता, उसे कुछ दूर पर उससे भी अधिक सुंदर गुलाब नजर आते और वह उसे छोड़ आगे बढ़ जाता।


ऐसा करते-करते वह बगीचे के मुहाने पर आ पहुंचा।


लेकिन यहां उसे जो फूल नजर आए वे एकदम मुरझाए हुए थे। आखिरकार वह फूल लिए बिना ही वापस आ गया।


उसे खाली हाथ देखकर संत ने पूछा, ‘क्या हुआ बेटा, गुलाब नहीं लाए?’ युवक बोला, ‘बाबा, मैं बगीचे के सुंदर और ताजा फूलों को छोड़कर आगे और आगे बढ़ता रहा, मगर अंत में केवल मुरझाए फूल ही बचे थे। आपने मुझे पलटकर फूल तोड़ने से मना किया था।


इसलिए मैं गुलाब के ताजा और सुंदर फूल नहीं तोड़ पाया।’उस पर संत मुस्करा कर बोले, ‘जीवन भी इसी तरह से है। इसमें शुरुआत से ही कर्म करते चलना चाहिए।


कई बार अच्छाई और सफलता प्रारंभ के कामों और अवसरों में ही छिपी रहती है। जो अधिक और सर्वोच्च की लालसा पाकर आगे बढ़ते रहते हैं, अंत में उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।’ युवक उनका आशय समझ गया।


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गणेश जी की आरती

श्री गणेश जी की आरती


जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े पुष्प चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
भक्तों की लाज राखो,
श्री गणपति देवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

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प्रदोष व्रत कब करें कैसे करें जानिए प्रदोष व्रत के महत्व एवं नियमो के बारे में :-

 प्रदोष व्रत कब करें कैसे करें जानिए प्रदोष व्रत के महत्व एवं नियमो के बारे में :-  


प्रदोष व्रत कब करें कैसे करें जानिए प्रदोष व्रत के महत्व एवं नियमो के बारे में :-



प्रदोष व्रत कब करें कैसे करें जानिए प्रदोष व्रत के महत्व एवं नियमो के बारे में :-  


पुराणों में कहा गया है कि व्रत करने से बेहतर स्वास्थ्य एवं लंबी आयु मिलती है ।

हमारे शास्त्रों में अनेक ऐसी साधनाएं एवं व्रतों का उल्लेख मिलता है जिनके करने से साधक व श्रद्धालु अपने निहित उद्देश्यों एवं मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं। 

पूर्ण श्रद्धाभाव से किया गया व्रत निश्चय ही फलदायी होता है। हिन्दू धर्म में कई ऐसे व्रत हैं जिनके करने से व्यक्ति अपने जीवन में लाभ प्राप्त कर सकता है किन्तु प्रदोष-व्रत का सनातन धर्म में अति-महत्त्वपूर्ण स्थान है। कलियुग में एक मात्र प्रदोष ऐसा व्रत है जो व्यक्ति के रोग, दोष, संतापों का नाश कर खुशियां प्रदान करता है ।

प्रदोष-व्रत चन्द्रमौलेश्वर भगवान शिव की प्रसन्नता व आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। भगवान शिव को आशुतोष भी कहा गया है, जिसका आशय है-शीघ्र प्रसन्न होकर आशीष देने वाले। प्रदोष-व्रत को श्रद्धा व भक्तिपूर्वक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 

प्रदोष-व्रत कैसे करें-


प्रदोष-व्रत प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को होता है। सभी पंचागों में प्रदोष-व्रत की तिथि का विशेष उल्लेख दिया गया होता है। व्रतादि ग्रंथों में किसी भी व्रत को प्रारंभ करने की तिथि, मास, पक्ष व मुहूर्त का उल्लेख मिलता है। शास्त्रानुसार प्रदोष-व्रत किसी भी मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से प्रारंभ किया जा सकता है। श्रावण व कार्तिक मास प्रदोष-व्रत को प्रारंभ करने के लिए अधिक श्रेष्ठ माने गए हैं। प्रदोष-व्रत का प्रारंभ  विधिवत् पूजन-अर्चन एवं संकल्प लेकर करना श्रेयस्कर रहता है। 

प्रदोष व्रत एक ही देश के दो अलग-अलग शहरों के लिए अलग हो सकते हैं। चूँकि प्रदोष व्रत सूर्यास्त के समय, त्रयोदशी के प्रबल होने पर निर्भर करता है। तथा दो शहरों का सूर्यास्त का समय अलग-अलग हो सकता है, इस प्रकार उन दोनो शहरों के प्रदोष व्रत का समय भी अलग-अलग हो सकता है।

इसीलिए कभी-कभी ऐसा भी देखने को मिलता है कि, प्रदोष व्रत त्रयोदशी से एक दिन पूर्व अर्थात द्वादशी तिथि के दिन ही हो जाता है।

सूर्यास्त होने का समय सभी शहरों के लिए अलग-अलग होता है अतः प्रदोष व्रत करने से पूर्व अपने शहर का सूर्यास्त समय अवश्य जाँच लें, चाहे वो शहर एक ही देश मे क्यों ना हों। प्रदोष व्रत चन्द्र मास की शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है।

 प्रदोष वाले दिन प्रात:काल स्नान करने के पश्चात भगवान शिव का षोडषोपचार पूजन करना चाहिए। एवं प्रदोष के दिन में केवल फलाहार ग्रहण कर प्रदोषकाल में भगवान शिव का अभिषेक पूजन कर व्रत का पारण करना चाहिए।  इस दिन तामसिक भोजन जैसे - शराब , मांस, प्याज, लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन किसी का भी अपमान करने से बचना चाहिए। प्रदोष व्रत के दिन देर तक नहीं सोना चाहिए। व्रतियों को अन्न, चावल और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रदोष व्रत के दिन काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। 

प्रदोषकाल क्या है-



प्रदोष-व्रत में प्रदोषकाल का बहुत महत्व होता है। प्रदोष वाले दिन प्रदोषकाल में ही भगवान शिव की पूजन संपन्न होना आवश्यक है। शास्त्रानुसार प्रदोषकाल सूर्यास्त से 2 घड़ी (48 मिनट) तक रहता है। कुछ विद्वान मतांतर से इसे सूर्यास्त से 2 घड़ी पूर्व व सूर्यास्त से 2 घड़ी पश्चात् तक भी मान्यता देते हैं। किन्तु प्रामाणिक शास्त्र व व्रतादि ग्रंथों में प्रदोषकाल सूर्यास्त से 2 घड़ी (48 मिनिट) तक ही माना गया है।

प्रदोष व्रत का महत्व


मान्यता और श्रध्दा के अनुसार स्त्री-पुरुष दोनों यह व्रत करते हैं। कहा जाता है कि इस व्रत से कई दोषों की मुक्ति तथा संकटों का निवारण होता है. यह व्रत साप्ताहिक महत्त्व भी रखता है।

 रवि प्रदोष रविवार के दिन होने वाले प्रदोष को रवि-प्रदोष कहा जाता है। रवि-प्रदोष व्रत दीर्घायु व आरोग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है। रवि-प्रदोष व्रत करने से साधक को आरोग्यता व अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

सोम प्रदोष सोमवार के दिन होने वाले प्रदोष को सोम-प्रदोष कहा जाता है। सोम-प्रदोष व्रत किसी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए किया जाता है। सोम-प्रदोष व्रत करने से साधक की अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है।

भौम प्रदोष मंगलवार के दिन होने वाले प्रदोष को भौम-प्रदोष कहा जाता है। भौम-प्रदोष व्रत ऋण मुक्ति के लिए किया जाता है। भौम-प्रदोष व्रत करने से साधक ऋण एवं आर्थिक संकटों से मुक्ति प्राप्त करता है।

बुधवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो, उपासक की सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।

गुरु प्रदोष गुरुवार के दिन होने वाले प्रदोष को गुरु-प्रदोष कहा जाता है। गुरु प्रदोष व्रत विशेषकर स्त्रियों के लिए होता है। गुरु प्रदोष व्रत दांपत्य सुख, पति सुख व सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है।

शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है।

शनि प्रदोष शनिवार के दिन होने वाले प्रदोष को शनि-प्रदोष कहा जाता है। शनि प्रदोष व्रत संतान प्राप्ति एवं संतान की उन्नति व कल्याण के लिए किया जाता है। शनि-प्रदोष व्रत करने से साधक को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जब प्रदोष व्रत किए जाते हैं तो व्रत से मिलने वाले फलों में वृ्द्धि होती है।

शास्त्रों के अनुसार, इस दिन समस्त जैसे ब्रह्म बेताल, देव, गंधर्व दिव्यात्माएं अपने सूक्ष्म स्वरूप में शिवलिंग में समा जाती हैं. त्रयोदशी तिथि पर प्रदोषकाल में शिवलिंग के केवल दर्शन करने से सभी जन्मों के पाप नष्ट होते हैं. साथ ही त्रयोदशी तिथि पर प्रदोषकाल में बिल्वपत्र चढ़ाकर दीप जलाने से अनेक पुण्य प्राप्त होते हैं ।








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मंगलवार, 20 फ़रवरी 2024

Aaj Ka Panchang | 21 February 2024 | आज का पंचांग | 21 फरवरी 2024

आज का वैदिक पंचांग  - दिनांक - 21 फरवरी 2024 | जानिए शुभ /अशुभ योग, लग्न, नक्षत्र, तिथि, व्रत , पर्व विवरण के बारे में ...


Aaj Ka Panchang | 21 February 2024 | आज का पंचांग | 21 फरवरी 2024

Aaj Ka Panchang | 21 February 2024 | आज का पंचांग | 21 फरवरी 2024


आज का वैदिक पंचांग 
दिनांक - 21 फरवरी 2024
दिन - बुधवार
विक्रम संवत् - 2080
अयन - उत्तरायण
ऋतु - वसंत
मास - माघ
पक्ष - शुक्ल
तिथि - द्वादशी सुबह 11:27 तक तत्पश्चात त्रयोदशी
नक्षत्र - पुनर्वसु दोपहर 02:18 तक तत्पश्चात पुष्य
योग - आयुष्मान दोपहर 11:51 तक तत्पश्चात सौभाग्य
राहु काल - दोपहर 11:56 से 01:23 तक
सूर्योदय - 06:10 AM
सूर्यास्त - 05:43 PM
दिशा शूल - उत्तर
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:30 से 05:20 तक
निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:31 से 12:21 तक
व्रत पर्व विवरण - जया एकादशी पारण , वराह द्वादशी, प्रदोष व्रत
विशेष -द्वादशी को पूतिका (पोई) एवं त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

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