रविवार, 31 मार्च 2024

आज का पंचांग - आज 31 मार्च 2024 , रविवार ।। वैदिक पंचांग ।। हिन्दू पंचांग कैलेंडर 2024

📜आज का वैदिक पंचांग 📜


🚩श्री गणेशाय नम:🚩 
📜आज का वैदिक पंचांग 📜

🏵️ 31 - Mar - 2024
🏵️ Balasore, India

🏵️ पंचांग    
🏵️ तिथि  षष्ठी  09:33 PM
🏵️ नक्षत्र  ज्येष्ठा  10:57 PM
🏵️ करण :
           गर  09:29 AM
           वणिज  09:29 AM
🏵️ पक्ष  कृष्ण  
🏵️ योग  व्यतीपात  09:51 PM
🏵️ वार  रविवार  

🏵️ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ    
🏵️ सूर्योदय  05:35 AM  
🏵️ चन्द्रोदय  11:27 PM  
🏵️ चन्द्र राशि  वृश्चिक  
🏵️ सूर्यास्त  05:57 PM  
🏵️ चन्द्रास्त  09:18 AM  
🏵️ ऋतु  वसंत  

🏵️ हिन्दू मास एवं वर्ष    
🏵️ शक सम्वत  1945  शोभकृत
🏵️ कलि सम्वत  5125  
🏵️ दिन काल  12:21 PM  
🏵️ विक्रम सम्वत  2080  
 🏵️ मास अमांत  फाल्गुन  
🏵️ मास पूर्णिमांत  चैत्र  

🏵️ शुभ और अशुभ समय    
🏵️ शुभ समय    
🏵️ अभिजित  11:21:48 - 12:11:13

🏵️ अशुभ समय    
🏵️ दुष्टमुहूर्त  04:18 PM - 05:07 PM
🏵️ कंटक  09:43 AM - 10:32 AM
🏵️ यमघण्ट  01:00 PM - 01:50 PM
🏵️ राहु काल  04:24 PM - 05:57 PM
🏵️ कुलिक  04:18 PM - 05:07 PM
🏵️ कालवेला या अर्द्धयाम  11:21 AM - 12:11 PM
🏵️ यमगण्ड  11:46 AM - 01:19 PM
🏵️ गुलिक काल  02:51 PM - 04:24 PM

🏵️ दिशा शूल    
🏵️ दिशा शूल  पश्चिम  

∆ व्रत पर्व विवरण - संत एकनाथजी षष्ठी , भद्रा , बिछुड़ो , सर्वार्थसिद्धियोग , गण्डमूल , रवि योग , विडाल योग ।

👉 विशेष - षष्ठी को नीम-भक्षण (पत्ती, फल खाने या दातुन मुँह में डालने) से नीच योनियों की प्राप्ति होती है ।


यह भी जाने 👉 
ज्योतिष ग्रंथ मुर्हूत चिंतामणि के अनुसार
हिंदू धर्म में दैनिक जीवन से जुड़ी भी अनेक मान्यताएं और परंपराएं हैं। ऐसी ही एक मान्यता है नाखून, दाढ़ी व बाल कटवाने से जुड़ी। माना जाता है कि सप्ताह के कुछ दिन ऐसे होते हैं जब नाखून, दाढ़ी व बाल कटवाना हमारे धर्म ग्रंथों में शुभ नहीं माना गया है, जबकि इसके बिपरीत कुछ दिनों को इन कामों के लिए शुभ माना गया है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं शास्त्र...

ज्योतिष ग्रंथ मुर्हूत चिंतामणि के अनुसार जानिए किस दिन नाखून, दाढ़ी व बाल कटवाने से होता है क्या असर..

सोमवार
सोम का संबंध चंद्रमा से है इसलिए सोमवार को बाल या नाखून काटना मानसिक स्वास्थ्य व संतान के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना गया है।

मंगलवार
मंगलवार को बाल कटवाना व दाढ़ी बनाना उम्र कम करने वाला माना गया है।

बुधवार
बुधवार के दिन नाखून और बाल कटवाने से घर में बरकत रहती है व लक्ष्मी का आगमन होता है।*

गुरुवार
गुरुवार को भगवान विष्णु का वार माना गया है। इस दिन बाल कटवाने से लक्ष्मी का नुकसान और मान-सम्मान की हानि होती है।

शुक्रवार
शुक्र ग्रह को ग्लैमर का प्रतीक माना गया है। इस दिन बाल और नाखून कटवाना शुभ होता है। इससे लाभ, धन और यश मिलता है।

शनिवार
शनिवार का दिन बाल कटवाने के लिए अशुभ होता है यह जल्दी मृत्यु का कारण माना जाता है।

रविवार
रविवार को बाल कटवाना अच्छा नहीं माना जाता है। महाभारत के अनुशासन पर्व में बताया गया है कि ये सूर्य का वार है इससे धन, बुद्धि और धर्म का नाश होता है।

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शनिवार, 30 मार्च 2024

आज का पंचांग - आज 30 मार्च 2024 , शनिवार ।। वैदिक पंचांग ।। हिन्दू पंचांग कैलेंडर 2024

📜आज का वैदिक पंचांग 📜


📜आज का वैदिक पंचांग 📜

☀ 30 - Mar - 2024
☀ Balasore, India

पंचांग    
🔅 तिथि  पंचमी  09:16 PM
🔅 नक्षत्र  अनुराधा  10:03 PM
🔅 करण :
           कौलव  08:53 AM
           तैतिल  08:53 AM
🔅 पक्ष  कृष्ण  
🔅 योग  सिद्धि  10:44 PM
🔅 वार  शनिवार  

सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ    
🔅 सूर्योदय  05:36 AM  
🔅 चन्द्रोदय  10:27 PM  
🔅 चन्द्र राशि  वृश्चिक  
🔅 सूर्यास्त  05:56 PM  
🔅 चन्द्रास्त  08:30 AM  
🔅 ऋतु  वसंत  

हिन्दू मास एवं वर्ष    
🔅 शक सम्वत  1945  शोभकृत
🔅 कलि सम्वत  5125  
🔅 दिन काल  12:19 PM  
🔅 विक्रम सम्वत  2080  
🔅 मास अमांत  फाल्गुन  
🔅 मास पूर्णिमांत  चैत्र  

शुभ और अशुभ समय    
☀ शुभ समय    
🔅 अभिजित  11:22:08 - 12:11:28
☀ अशुभ समय    
🔅 दुष्टमुहूर्त  05:36 AM - 06:26 AM
🔅 कंटक  11:22 AM - 12:11 PM
🔅 यमघण्ट  02:39 PM - 03:28 PM
🔅 राहु काल  08:41 AM - 10:14 AM
🔅 कुलिक  06:26 AM - 07:15 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  01:00 PM - 01:50 PM
🔅 यमगण्ड  01:19 PM - 02:51 PM
🔅 गुलिक काल  05:36 AM - 07:09 AM
दिशा शूल    
🔅 दिशा शूल  पूर्व  


∆ व्रत पर्व विवरण - रंग पंचमी, व्यतीपात योग

👉 विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

यह भी जाने 👉 व्यतिपात योग :

समय अवधि : 30 मार्च रात्रि 10:47 से 31 मार्च रात्रि 09:53 तक ।*

व्यतिपात योग में किया हुआ जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल १ लाख गुना होता है । - वराह पुराण

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शुक्रवार, 29 मार्च 2024

आज का पंचांग - आज 29 मार्च 2024 , शुक्रवार ।। वैदिक पंचांग ।। हिन्दू पंचांग कैलेंडर 2024

📜आज का वैदिक पंचांग 📜


📜आज का वैदिक पंचांग 📜

29 - March - 2024
☀ Balasore, India

पंचांग    
🔅 तिथि  चतुर्थी  08:23 PM
🔅 नक्षत्र  विशाखा  08:36 PM
🔅 करण :
           बव  07:44 AM
           बालव  07:44 AM
🔅 पक्ष  कृष्ण  
🔅 योग  वज्र  11:10 PM
🔅 वार  शुक्रवार  

सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ    
🔅 सूर्योदय  05:37 AM  
🔅 चन्द्रोदय  09:30 PM  
🔅 चन्द्र राशि  तुला  
🔅 सूर्यास्त  05:56 PM  
🔅 चन्द्रास्त  07:48 AM  
🔅 ऋतु  वसंत  

हिन्दू मास एवं वर्ष    
🔅 शक सम्वत  1945  शोभकृत
🔅 कलि सम्वत  5125  
🔅 दिन काल  12:18 PM  
🔅 विक्रम सम्वत  2080  
🔅 मास अमांत  फाल्गुन  
🔅 मास पूर्णिमांत  चैत्र  

शुभ और अशुभ समय    
☀ शुभ समय    
🔅 अभिजित  11:22:29 - 12:11:44
☀ अशुभ समय    
🔅 दुष्टमुहूर्त  08:05 AM - 08:54 AM
🔅 कंटक  01:00 PM - 01:50 PM
🔅 यमघण्ट  04:17 PM - 05:07 PM
🔅 राहु काल  10:14 AM - 11:47 AM
🔅 कुलिक  08:05 AM - 08:54 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  02:39 PM - 03:28 PM
🔅 यमगण्ड  02:51 PM - 04:24 PM
🔅 गुलिक काल  07:10 AM - 08:42 AM
दिशा शूल    
🔅 दिशा शूल  पश्चिम  

∆ व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थ सिद्धि योग , गुड फ्राइडे ।

👉 विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

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गुरुवार, 28 मार्च 2024

वृंदावन श्री बांकेबिहारी जी मंदिर में ग्रीष्मकालीन दर्शन समय में बदलाव ( Grishmkalin Darshan Timing Changed at Banke Bihari Mandir)

वृंदावन श्री बांकेबिहारी जी मंदिर में ग्रीष्मकालीन दर्शन समय में बदलाव 

( Grishmkalin Darshan Timing Changed at Banke Bihari Mandir)

वृंदावन श्री बांकेबिहारी जी मंदिर में ग्रीष्मकालीन दर्शन समय में बदलाव ( Grishmkalin Darshan Timing Changed at Banke Bihari Mandir)



 वृंदावन श्री बांके बिहारी जी मंदिर में होली के बाद पड़ने वाली चैत्र कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि यानी 27 मार्च बुधवार से दर्शन के लिए पट सुबह 7.45 बजे खुलेंगे और दोपहर 12 बजे बंद हो जाएंगे। इसी तरह शाम को 5.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे और रात 9.30 बजे शयनभोग आरती के बाद बंद कर दिए जाएंगे।


सुबह एक घंटा पहले दर्शन खुलेंगे और शाम को एक घंटा देर से कपाट बंद होंगे। जबकि अभी तक मंदिर के कपाट सुबह 8.45 बजे खुलते थे और दोपहर 1 बजे बंद हो जाते थे और शाम को 4.30 से 8.30 बजे तक भगवान के दर्शन होते थे। मंदिर में ग्रीष्मकालीन दर्शन समय सारणी की यह व्यवस्था दिवाली तक जारी रहेगी।

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Laxmi Mata Aarti Lyrics | लक्ष्मी माता जी की आरती हिंदी लिरिक्स | #वैदिकसंस्कृति

 Lakshmi Mata Aarti Lyrics in Hindi 

( लक्ष्मी माता जी की आरती हिंदी लिरिक्स )

लक्ष्मी माता जी की आरती हिंदी लिरिक्स



ॐ जय लक्ष्मी माता , मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत

हरि विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता


∆ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता

ॐ जय लक्ष्मी माता 


∆ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता

जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता

ॐ जय लक्ष्मी माता


∆ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता

ॐ जय लक्ष्मी माता

 

∆ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता

ॐ जय लक्ष्मी माता 


∆ शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता

ॐ जय लक्ष्मी माता 


∆ महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता

ॐ जय लक्ष्मी माता 


 ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत

हरि विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता 


#लक्ष्मीजीआरतीलिरिक्स #laxmijiaarti #vedicsanskriti

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आज का पंचांग | 28 मार्च 2024 | दैनिक पंचांग | वैदिक संस्कृति | Aaj Ka Panchang

आज का वैदिक पंचांग ( Balasore , Odisha )


आज का वैदिक पंचांग ( Balasore , Odisha )

दिनांक - 28 मार्च 2024
दिन - गुरुवार
विक्रम संवत् - 2080
अयन - उत्तरायण
ऋतु - वसंत
मास - चैत्र
पक्ष - कृष्ण
तिथि - तृतीया शाम 06:56 तक तत्पश्चात चतुर्थी
नक्षत्र - स्वाती शाम 06:38 तक तत्पश्चात विशाखा
योग - हर्षण रात्रि 11:13 तक तत्पश्चात वज्र
राहु काल - दोपहर 01:19 से 02:52 तक
सूर्योदय - 05:39
सूर्यास्त - 05:56
दिशा शूल - दक्षिण
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:05 से 04:52 तक
निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:23 से 12:10 तक

व्रत पर्व विवरण - संकष्ट चतुर्थी, छत्रपति शिवाजी जयंती (ति.अ.)

विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

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संकष्ट चतुर्थी - 28 मार्च 2024
  (चंद्रोदय : रात्रि 07:42)

क्या है संकष्ट चतुर्थी ?

संकष्ट चतुर्थी का मतलब होता है संकट को हरने वाली चतुर्थी । संकष्ट संस्कृत भाषा से लिया गया एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘कठिन समय से मुक्ति पाना’।*

इस दिन व्यक्ति अपने दुःखों से छुटकारा पाने के लिए गणपति की अराधना करता है । पुराणों के अनुसार चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की पूजा करना बहुत फलदायी होता है । इस दिन लोग सूर्योदय के समय से लेकर चन्द्रमा उदय होने के समय तक उपवास रखते हैं । संकष्ट चतुर्थी को पूरे विधि-विधान से गणपति की पूजा-पाठ की जाती है ।*

संकष्ट चतुर्थी पूजा विधि

गणपति में आस्था रखने वाले लोग इस दिन उपवास रखकर उन्हें प्रसन्न कर अपने मनचाहे फल की कामना करते हैं ।

 इस दिन आप प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठ जाएँ ।

 व्रत करने वाले लोग सबसे पहले स्नान कर साफ और धुले हुए कपड़े पहन लें । इस दिन लाल रंग का वस्त्र धारण करना बेहद शुभ माना जाता है और साथ में यह भी कहा जाता है कि ऐसा करने से व्रत सफल होता है ।

स्नान के बाद वे गणपति की पूजा की शुरुआत करें । गणपति की पूजा करते समय जातक को अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए ।

सबसे पहले आप गणपति की मूर्ति को गंगाजल से स्नान करवाकर पुष्प पुष्पमालाओं से अच्छी तरह से सजा लें ।

 पूजा में आप वस्त्र , यज्ञोपवीत , कुंकुम , चन्दन , केशर , चावल , तिल, , पुष्प , दूर्वा , इत्र ,  गुड़ , लड्डू , पुष्प , फल , ताम्बूल , ताम्बे के कलश में पानी, धुप, दीप , कर्पूर एवं  विशेष प्रसाद के तौर पर केला या नारियल रख लें ।

 ध्यान रहे कि पूजा के समय आप देवी दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति भी अपने पास रखें । ऐसा करना बेहद शुभ माना जाता है ।

गणपति जी को स्न्नान करवाकर वस्त्र यज्ञोपवीत पहनाकर कुंकुम चन्दन केशर का तिलक लगाएं, चावल लगाएं पुष्प और दूर्वा अर्पित करें ।

 संकष्टी को भगवान् गणपति को तिल के लड्डू और मोदक का भोग लगाएं । फिर भगवान की फल ओर ताम्बूल अर्पित करें एवं दक्षिणा चढाये ।

गणपति के सामने धूप-दीप जला कर निम्लिखित मन्त्र का जाप करें ।

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।


पूजा के बाद आप फल फ्रूट्स आदि प्रसाद सेवन करें ।

शाम के समय चांद के निकलने से पहले आप गणपति की पूजा करें और संकष्ट व्रत कथा का पाठ करें ।

 पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद बाटें । रात को चाँद देखने के बाद व्रत खोला जाता है और इस प्रकार संकष्ट चतुर्थी का व्रत पूर्ण होता है ।

कार्य सिद्धि के लिए

1. ॐ सुमुखाय नम: 2. ॐ एकदंताय नम: 3. ॐ कपिलाय नम: 4. ॐ गजकर्णाय नम: 5. ॐ लंबोदराय नम: 6. ॐ विकटाय नम: 7. ॐ विघ्ननाशाय नम: 8. ॐ विनायकाय नम: 9. ॐ धूम्रकेतवे नम: 10. ॐ गणाध्यक्षाय नम: 11. ॐ भालचंद्राय नम: 12. ॐ गजाननाय नम: ।

जो भी साधक श्री गणेश जी को रोज सिंदूर अर्पित कर इन 12 नाम का जाप करता है उसे कार्य सिद्धि प्राप्त होती है । - नारद पुराण

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गुरुवार विशेष

हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है ।

गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें 

एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।
  
ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।

फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें ।
( लोक कल्याण सेतु , अंक - ११६ )

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बुधवार, 27 मार्च 2024

प्रेरणादायक कहानियाँ - झूठा दिखावा । Inspirational Stories - false pretences । वैदिक संस्कृति

 प्रेरणादायक कहानियाँ - झूठा दिखावा

प्रेरणादायक कहानियाँ - Inspirational Stories


Inspirational Stories - false pretences


एक जंगल में बंदरों का बड़ा झुंड था ।उस जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी इसलिए सारे बंदर बहुत आराम और संतुष्ट होकर रहते थे।


एक दिन एक वैज्ञानिक अपनी बेटी के साथ उसी जंगल में शोध करने के लिए आया। अपना तम्बू लगाने के बाद वैज्ञानिक पौधों के नमूने इकट्ठा करने के लिए बाहर निकला ।


लेकिन लड़की तम्बू की सुंदरता को देखकर रुक गयी। उसने पहले ज़मीन पर एक पुराना कालीन रखा और उस पर एक बिस्तर बिछाया। तम्बू के बीच लालटेन लटकाई और उसके नीचे एक छोटी मेज़ और सफेद सेब से भरा कटोरा  रख दिया। 


वह सेब देखने में बहुत ताज़ा, खुबसूरत और बड़े  लग रहे थे। 


सारे बन्दर लालच से उस कृत्रिम सेब को पेड़ों पर बैठे देख रहे थे। 


तम्बू के सामने जगह साफ करने के लिए लड़की बाहर निकली,तब एक बंदर ने तेज़ी से झपटा मारा और एक कृत्रिम सेब उठा लिया ।तभी उसी समय लड़की की नज़र भी उस पर पड़ गयी, लड़की ने तुरंत बंदूक उठाकर निशाना लगाया और गोली दाग दिया, लेकिन सभी बंदर इतनी देर में वहां से भाग गए।


काफी देर के बाद सारे बन्दर रुक गए जब उन्होंने देखा कि अब उनका कोई पीछा नहीं कर रहा है। 


चोर बंदर ने हाथ उठाकर सबको सेब दिखाया। सभी बंदर हैरत से और ललचाई नज़र से उस बंदर को देखने लगे कि उसे कितना अच्छा सेब मिला है ।सभी इस कृत्रिम सेब को हाथ लगाने की कोशिश करने लगे।


चोर बंदर ने सबको फटकार कर ये कृत्रिम सेब लिया और एक पेड़ की सबसे ऊंची शाख पर जाकर सेब खाने के लिए मुंह में दबा दिया।


 कृत्रिम सेब बेहद कड़े प्लास्टिक से बना था । बंदर के दांतों में चबाने से दर्द शुरू हो गया। बंदर ने दो तीन बार और कोशिश की लेकिन हर बार दर्द होने लगा।


उस दिन चोर बंदर ने पेड़ की उसी शाखा पर भूखा रहकर गुज़ारा । अगले दिन वह पेड़ से नीचे आया ।


सभी बंदरों ने उसे सम्मान से देखा, क्योंकि उसके हाथ में वो कृत्रिम सेब मौजूद था। दूसरे बंदरों से मिलने वाला सम्मान को देखकर चोर बंदर ने सेब पर पकड़ मज़बूत बना ली। 


अब दूसरे बंदर फलों की तलाश में निकले और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक कूद कर फल तोड़ तोड़कर खाने लगे।


चोर बंदर के एक हाथ में  कृत्रिम सेब था,इसलिए वो पेड़ पर नहीं चढ़ सका। वो सेब को हाथ से नहीं छोड़ना चाहता था इसलिए वह दिन भर भूखा प्यासा रहा और यही सिलसिला आगे कुछ दिन तक चलता रहा। 


हालांकि दूसरे बंदर उसके हाथ में कृत्रिम सेब देखकर उसका सम्मान करते लेकिन उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं देते।


चोर बंदर भूख से इतना निढाल हो गया था कि अब उसे अपना आखिरी वक़्त नज़र आने लगा। उसने एक बार फिर उस सेब को खाने की कोशिश की लेकिन इस बार नतीजा अलग नहीं था। उसके दांत इस बार भी दर्द कर रहे थे ।


 चोर बंदर को आँखों के सामने पेड़ों से लटका हुआ फल दिखाई दे रहा था। लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इन पेड़ों पर चढ़ सके। धीरे धीरे उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गई। जैसे ही उसकी जान निकली कृत्रिम सेब पर पकड़ ढीली होने से वो उसके हाथ से बाहर लुढ़क गया।


शाम को बाकी बंदर, मरे बंदर के पास आए, कुछ आंसू बहाये और उसके शरीर को पत्तों से ढक दिया। जब वो ये कर रहे थे तब एक और बंदर को एक कृत्रिम सेब मिला और उसने अपना हाथ  ऊँचा कर के सभी बंदरो को सेब दिखाना शुरू कर दिया।

.........


दुनिया की मिसाल इस प्लास्टिक के सेब की तरह है, इससे कुछ नहीं मिलता। जबकी इसे देखने वाले प्रेरित होते रहते हैं और दुनिया को हाथ में रखने का दावेदार आख़िर में ख़ाली हाथ इस दुनिया से चला जाता है। कोई और आकर उसकी दुनिया पर क़ब्ज़ा कर लेता है।


"झूठा दिखावा इंसान को पहले थका देता है और फिर मार डालता है।"


प्रेषक:- सरवर चौधरी , अजमेर


#Vedicsanskarti #वैदिकसंस्कृति #प्रेरणादायक_कहानियाँ

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आज से बहेगी श्रीमद् भागवत गंगा धर्म नगरी कालू बीकानेर राजस्थान में

आज से बहेगी श्रीमद् भागवत गंगा धर्म नगरी कालू बीकानेर राजस्थान में 

अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री धर्मेश जी महाराज करेंगे साप्ताहिक कथा वाचन.. 

कालू खेड़े री कालका मां की असीम कृपा से कालका माता मंदिर प्रांगण कालू राजस्थान में श्री धर्मेश जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित होने वाली संगीतमय श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ दिनाँक 27 मार्च बुधवार से विधिवत प्रारंभ होगा । इससे पूर्व मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी । श्रीमती गीता देवी राठी , धर्मपत्नी स्व. रामचन्द्र जी राठी एवं समस्त राठी परिवार कालू , राजस्थान द्वारा आयोजित इस दिव्य आयोजन के बारे में राठी परिवार ने बताया कि कथा सम्बंधित सभी तैयारियां पूर्ण हो गयी है । कलश यात्रा नगर के मुख्य मुख्य मार्गो से होते हुए कथा पंडाल पहुंचेगी । जहां अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता गौवत्स श्री धर्मेश जी महाराज अपनी सुरमयी पीयूष वाणी में श्रद्धालुओं को श्री मद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे । कथा को लेकर विभिन्न व्यवस्थाएं बनाने के लिए कार्यकर्ताओं की अलग अलग जिम्मेदारीयां तय की गई है । कथा 2 अप्रेल तक चलेगी । कथा का समय दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक का रहेगा । कथा को लेकर कथा स्थल श्री कालका माता मंदिर प्रांगण में भव्य पंडाल लगाने सहित सुंदर सजावट की गई है । कथा को लेकर नगर सहित आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार किया गया है ।
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