आज का पंचांग - आज 31 मार्च 2024 , रविवार ।। वैदिक पंचांग ।। हिन्दू पंचांग कैलेंडर 2024
लेबल: पंचांग
वैदिक-संस्कृति सत्य, सनातन है और वेद को अनादि अथवा ईश्वरीय माना गया है । | क्योंकि मनुष्य और उसकी सभ्यता के बारे में सबसे प्राचीन इतिहास भी इसी संस्कृति की देन है | जिसमें ऋषियों द्धारा मानव समाज को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिये मर्यादित आचरण की व्यवस्था दी गयी, जबकि आज के युग में मर्यादा का सर्वथा अभाव है | यही कारण है कि कालान्तर से आज तक वैदिक-संस्कृति ने अपने अस्तित्व को बनाये रखा है | जो आश्चर्यजनक परन्तु अटल सत्य भी है | #Vedicsanskrti #वैदिकसंस्कृति
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वृंदावन श्री बांके बिहारी जी मंदिर में होली के बाद पड़ने वाली चैत्र कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि यानी 27 मार्च बुधवार से दर्शन के लिए पट सुबह 7.45 बजे खुलेंगे और दोपहर 12 बजे बंद हो जाएंगे। इसी तरह शाम को 5.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे और रात 9.30 बजे शयनभोग आरती के बाद बंद कर दिए जाएंगे।
सुबह एक घंटा पहले दर्शन खुलेंगे और शाम को एक घंटा देर से कपाट बंद होंगे। जबकि अभी तक मंदिर के कपाट सुबह 8.45 बजे खुलते थे और दोपहर 1 बजे बंद हो जाते थे और शाम को 4.30 से 8.30 बजे तक भगवान के दर्शन होते थे। मंदिर में ग्रीष्मकालीन दर्शन समय सारणी की यह व्यवस्था दिवाली तक जारी रहेगी।
लेबल: धर्म संसार
ॐ जय लक्ष्मी माता , मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत
हरि विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता
∆ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
∆ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
∆ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता
∆ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता
∆ शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
∆ महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत
हरि विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता
लेबल: आरतियां
लेबल: पंचांग
एक जंगल में बंदरों का बड़ा झुंड था ।उस जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी इसलिए सारे बंदर बहुत आराम और संतुष्ट होकर रहते थे।
एक दिन एक वैज्ञानिक अपनी बेटी के साथ उसी जंगल में शोध करने के लिए आया। अपना तम्बू लगाने के बाद वैज्ञानिक पौधों के नमूने इकट्ठा करने के लिए बाहर निकला ।
लेकिन लड़की तम्बू की सुंदरता को देखकर रुक गयी। उसने पहले ज़मीन पर एक पुराना कालीन रखा और उस पर एक बिस्तर बिछाया। तम्बू के बीच लालटेन लटकाई और उसके नीचे एक छोटी मेज़ और सफेद सेब से भरा कटोरा रख दिया।
वह सेब देखने में बहुत ताज़ा, खुबसूरत और बड़े लग रहे थे।
सारे बन्दर लालच से उस कृत्रिम सेब को पेड़ों पर बैठे देख रहे थे।
तम्बू के सामने जगह साफ करने के लिए लड़की बाहर निकली,तब एक बंदर ने तेज़ी से झपटा मारा और एक कृत्रिम सेब उठा लिया ।तभी उसी समय लड़की की नज़र भी उस पर पड़ गयी, लड़की ने तुरंत बंदूक उठाकर निशाना लगाया और गोली दाग दिया, लेकिन सभी बंदर इतनी देर में वहां से भाग गए।
काफी देर के बाद सारे बन्दर रुक गए जब उन्होंने देखा कि अब उनका कोई पीछा नहीं कर रहा है।
चोर बंदर ने हाथ उठाकर सबको सेब दिखाया। सभी बंदर हैरत से और ललचाई नज़र से उस बंदर को देखने लगे कि उसे कितना अच्छा सेब मिला है ।सभी इस कृत्रिम सेब को हाथ लगाने की कोशिश करने लगे।
चोर बंदर ने सबको फटकार कर ये कृत्रिम सेब लिया और एक पेड़ की सबसे ऊंची शाख पर जाकर सेब खाने के लिए मुंह में दबा दिया।
कृत्रिम सेब बेहद कड़े प्लास्टिक से बना था । बंदर के दांतों में चबाने से दर्द शुरू हो गया। बंदर ने दो तीन बार और कोशिश की लेकिन हर बार दर्द होने लगा।
उस दिन चोर बंदर ने पेड़ की उसी शाखा पर भूखा रहकर गुज़ारा । अगले दिन वह पेड़ से नीचे आया ।
सभी बंदरों ने उसे सम्मान से देखा, क्योंकि उसके हाथ में वो कृत्रिम सेब मौजूद था। दूसरे बंदरों से मिलने वाला सम्मान को देखकर चोर बंदर ने सेब पर पकड़ मज़बूत बना ली।
अब दूसरे बंदर फलों की तलाश में निकले और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक कूद कर फल तोड़ तोड़कर खाने लगे।
चोर बंदर के एक हाथ में कृत्रिम सेब था,इसलिए वो पेड़ पर नहीं चढ़ सका। वो सेब को हाथ से नहीं छोड़ना चाहता था इसलिए वह दिन भर भूखा प्यासा रहा और यही सिलसिला आगे कुछ दिन तक चलता रहा।
हालांकि दूसरे बंदर उसके हाथ में कृत्रिम सेब देखकर उसका सम्मान करते लेकिन उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं देते।
चोर बंदर भूख से इतना निढाल हो गया था कि अब उसे अपना आखिरी वक़्त नज़र आने लगा। उसने एक बार फिर उस सेब को खाने की कोशिश की लेकिन इस बार नतीजा अलग नहीं था। उसके दांत इस बार भी दर्द कर रहे थे ।
चोर बंदर को आँखों के सामने पेड़ों से लटका हुआ फल दिखाई दे रहा था। लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इन पेड़ों पर चढ़ सके। धीरे धीरे उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गई। जैसे ही उसकी जान निकली कृत्रिम सेब पर पकड़ ढीली होने से वो उसके हाथ से बाहर लुढ़क गया।
शाम को बाकी बंदर, मरे बंदर के पास आए, कुछ आंसू बहाये और उसके शरीर को पत्तों से ढक दिया। जब वो ये कर रहे थे तब एक और बंदर को एक कृत्रिम सेब मिला और उसने अपना हाथ ऊँचा कर के सभी बंदरो को सेब दिखाना शुरू कर दिया।
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दुनिया की मिसाल इस प्लास्टिक के सेब की तरह है, इससे कुछ नहीं मिलता। जबकी इसे देखने वाले प्रेरित होते रहते हैं और दुनिया को हाथ में रखने का दावेदार आख़िर में ख़ाली हाथ इस दुनिया से चला जाता है। कोई और आकर उसकी दुनिया पर क़ब्ज़ा कर लेता है।
प्रेषक:- सरवर चौधरी , अजमेर
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